Chandrayaan-1 और Chandrayaan-2 की पूरी जानकारी हिंदी में

Chandrayaan (चंद्रयान) भारत एक मिशन हैं जिसके द्वारा चन्द्रमा पर पानी की उपलब्धता, खनिज, चंद्रमा की सतह के नक्शा, वातावरण और हीलियम आदि की तलाश करना हैं| अभी तक भारत, मिशन चंद्रयान के तहत Chandrayaan-1 और Chandrayaan-2 दो चंद्रयान, चन्द्रमा पर भेज चुका हैं।

इस पोस्ट में आज हम चंद्रयान-1 और चंद्रयान-2 मिशन से जुड़े सभी महत्वपूर्ण तथ्य पर बात करेंगे, जो आपके आने वाले परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण हैं और इससे जुड़े कुछ प्रश्न अपने Exam में पूछे जा सकते हैं।

chandrayaanMission Chandrayaan

चंद्रयान दो शब्दों. चन्द्र और यान से मिलकर बना हैं। संस्कृत और हिंदी भाषा में चन्द्र का मतलब चन्द्रमा तथा यान का मलतब वाहन होता हैं। अर्थात चंद्रयान का तात्पर्य चंद्रमा अंतरिक्ष-यान हैं।

चंद्रयान मिशन की शुरुआत भारत की अंतरिक्ष एजेंसी ISRO सन 2008 किया। ISRO का full form Indian Space Research Organisation हैं। हिंदी में इसरो का पूरा नाम भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन हैं।

Chandrayaan-1 (चंद्रयान-1)

चंद्रयान-1 भारत के Space Agency ISRO द्वारा चाँद पर भेजा गया, भारत का पहला चन्द्र मिशन था। चंद्रयान-1 भारत का प्रथम भारतीय ग्रहीय विज्ञान और अन्वेषण मिशन था।

भारत के पहले चंद्रयान मिशन का बजट 386 करोड़ रूपये था। एम. अन्नादुरई की देख-रेख में चंद्रयान-1 अंतरिक्ष यान का डिजाइन किया गया था।

चूँकि पृथ्वी से चन्द्रमा की दूरी 3 लाख 86 हजार किलोमीटर हैं, जोकि संचार उपग्रहों की कक्षा से 10 गुना अधिक दूरी है।

पृथ्वी से चन्द्रमा की दूरी इतनी अधिक होने के कारण चंद्रयान-1 से संचार स्थापित करना इसरो के लिए बहुत कठिन काम था।

इसलिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने संकेतों को प्राप्त करने और भेजने के लिए कहीं अधिक शक्तिशाली सेंसर बनाये।

Chandrayaan-1 का प्रक्षेपण

Chandrayaan-1, 22 अक्टूबर 2008 को भारत के आंध्र प्रदेश राज्य में स्थित श्रीहरिकोटा (शार-SHAR) के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित या लॉन्च किया गया था।

चंद्रयान-1 एक प्रकार का उपग्रह था| किसी भी उपग्रह को लॉन्च करने या अंतरिक्ष में भेजने के लिए रॉकेट या वाहन की आवश्यकता होती हैं।

इस प्रकार के रॉकेट या वाहन को हम ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण वाहन कहते हैं| इसको अंग्रेजी में Polar Satellite Launch Vehicle (PSLV) कहते हैं।

चंद्रयान-1 को भारतीय रॉकेट पोलर सैटेलाइट लॉन्च वीइकल (PSLV-C11) द्वारा 22 अक्टूंबर 2008 को सफलतापूर्वक चंद्रमा की कक्षा में भेजा गया था।

चन्द्रमा तक पहुचने में चंद्रयान-1 को 5 दिन लगे और चन्द्रमा की कक्षा में स्थापित करने में कुल 15 दिन लगे। चंद्रयान-1, चंद्रमा की सतह से 100 किलोमीटर की उचाई पर चन्द्रमा की परिक्रमा कर रहा था।

14 नवंबर 2008 को चंद्रयान-1 ऑर्बिटर का मून इम्पैक्ट प्रोब (MIP) चन्द्रमा की सतह पर उतरा, जिससे भारत चंद्रमा की सतह पर पहुचने और अपना गाड़ने वाला चौथा देश बन गया। भारत से पहले 3 देश अमेरिका, रूस और चीन ही चन्द्रमा की सतह तक पहुच पाए हैं।

चंद्रयान-1 का आकार

प्रक्षेपण के समय चंद्रयान-1 का वजन 1380 किलोग्राम और लम्बाई 44.4 मीटर था। चन्द्रमा पर पहुचने पर चंद्रयान-1 वजन 575 किलोग्राम हो गया था

इसके ऊर्जा का मुख्य स्रोत सोलर पैनल जो जो 7०० वाट की क्षमता (Power) का है। इस पॉवर को लीथियम-आयन बैटरियों में भर कर उपयोग किया जाता था।

चंद्रयान-1 पर लगे वैज्ञानिक उपकरण

अंतरिक्ष यान चंद्रयान-1 पर कुल 11 वैज्ञानिक उपकरण लगे थे। इनमें पाँच भारतीय और छह विदेशी उपकरण लगे थे।

चंद्रयान-1, भारत, संयुक्त राष्ट्र अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, स्वीडन और बल्गेरिया में निर्मित 11 वैज्ञानिक उपकरणों को वहन किया था।

विदेशी उपकरण में ईएसए (European Space Agency) के तीन, नासा के दो तथा बल्गेरियाई विज्ञान अकादमी का एक वैज्ञानिक उपकरण शामिल है।

चंद्रयान-1 मिशन की अवधि

चंद्रयान-1 28 अगस्‍त 2009 तक 312 दिनों के लिए प्रचालन में रहा। वैसे तो चंद्रयान-1 का कार्यकाल 2 वर्ष के लिए था लेकिन बीच में ISRO का इससे संपर्क टूट गया।

इसके कारण चंद्रयान-1 का कार्यकाल सिर्फ 312 दिन अर्थात 10 महीने और 6 दिन तक ही रहा।

प्रथम चंद्रयान ने चंद्रमा के चारों ओर 3,000 से भी अधिक परिक्रमाएं पूरी की है और चंद्रमा की सतह की 70,000 से भी अधिक फोटो अर्थात प्रतिबिंबों को भेजा|

चंद्रयान-1 मिशन का उद्देश्य

Chandrayaan-1 मिशन का उद्देश्य चन्द्रमा का एटलस तैयार करना, पानी के अंश, हीलियम, मैग्नीशियम, एल्यूमीनियम, सिलिकॉन, कैल्शियम, आइरन तथा टाइटेनियम जैसे खनिजों और  रेडॉन, यूरेनियम और थोरियम जैसे तत्वों का चंद्रमा की पूरी सतह पर उपस्थिति का रासायनिक और खनिजीय मानचित्र तैयार करना आदि था।

चंद्रयान-1 मिशन की उपलब्धि

इस मिशन ने चन्द्रमा पर पानी होने की पुष्टि करके पूरी दुनिया को चकित कर दिया, क्योंकि आज तक किसी भी देश के चन्द्र मिशन ने चन्द्रमा पर पानी नही खोज पाए हैं।

चंद्रयान-1 ने चांद के उत्तरी ध्रुव के क्षेत्र में बर्फ के रूप में पानी होने की खोज की थी। इसके अलावा चन्द्रमा पर एल्‍युमिनियम, मैग्निशियम और सिलिकॉन होने का पता भी लगाया। इस मिशन की एक और बड़ी उपलब्धि चंद्रमा का वैश्विक मानचित्र तैयार करना भी हैं।

Chandrayaan-2 (चंद्रयान-2)

चंद्रयान-2 असल में मिशन चंद्रयान-1 की ही अगली श्रृंखला या कड़ी हैं। चंद्रयान-2 भारत का चन्द्रमा पर दूसरा मिशन हैं। इसे भारत के स्पेस एजेंसी भारतीय अंतरिक्ष अनुसन्धान संगठन (ISRO) ने बनाया है।

यह एक भारतीय मिशन हैं जिसे चाँद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में उतारने के लिए बनाया गया हैं। अभी तक चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में देश नही पहुच पाया हैं।

chandrayaan-2

Chandrayaan-2 अभियान को GSLV Mk III (Geosynchronous Satellite Launch Vehicle Mark III) प्रक्षेपण यान द्वारा प्रक्षेपित किया गया।

चंद्रयान-2 का इतिहास

22 अक्टूबर 2008 को चंद्रयान-1 के प्रक्षेपण से पहले ही 12 नवंबर 2007 को भारत के अंतरिक्ष एजेंसी (Space Agency) इसरो और रूस की अंतरिक्ष एजेंसी रूसी संघीय अंतरिक्ष अभिकरण (रशियन फेडरल स्पेस एजेंसी) के प्रतिनिधियों ने चंद्रयान-2 मिशन या परियोजना पर एक साथ काम करने के एक समझौते पर हस्ताक्षर किये थे।

इस समझौते के तहत भारत और रूस के अंतरिक्ष एजेंसी के बीच इस बात पर सहमति हुई थी की ऑर्बिटर तथा रोवर इसरो बनायेगा और लैंडर रूसी अंतरिक्ष एजेंसी (रोसकोसमोस) बनायेगा।

उस समय के तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने 18 सितंबर, 2008 को चंद्रयान-2 मिशन को मंजूरी दी थी।

दोनों देशो भारत और रुस के वैज्ञानिकों के संयुक्त प्रयास से अगस्त, 2009 में चंद्रयान-2 अंतरिक्ष यान की डिजाइन (Design) को पूरा कर लिया गया था। लेकिन 2013 में चंद्रयान-2 अभियान गया।

केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद 2016 में इस अभियान को फिर से शुरू किया गया। रूसी अंतरिक्ष एजेंसी ने समय पर लैंडर को बना नही पाया था।

रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोसकोसमोस के द्वारा बाद में मंगल ग्रह के लिए भेजे फोबोस-ग्रंट अभियान असफल हो गया, इस कारण ISRO ने रूस को चंद्रयान-2 अभियान से अलग कर दिया।

इसके बाद इसरो ने इस अभियान को सफल बनाने के लिए अकेले ही जुट गये और दिन-रात मेहनत के बाद 2019 के मध्य तक पूरी तरह बनकर तैयार हो चुका था।

Chandrayaan-2 का प्रक्षेपण

भारत ने Chandrayaan-2 को 22 जुलाई 2019 को आंध्र प्रदेश राज्य में स्थित श्रीहरिकोटा (शार-SHAR) के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से प्रक्षेपित या लॉन्च किया। भारतीय समय के अनुसार यह प्रक्षेपण 02:43 AM पर किया गया।

जिस अंतरिक्ष यान या रॉकेट (GSLV Mk III) से चन्द्रयान-2 को launch किया गया उसे बाहुबली रॉकेट भी कहा जाता हैं। यह rocket अपने साथ एक चन्द्र कक्षयान, एक रोवर एवं एक लैंडर लेकर प्रक्षेपित हुआ।

चंद्रयान-2 का आकार और गुण

प्रक्षेपण के समय चंद्रयान-2 का वजन 3877 किलोग्राम था, कक्षयान का वजन 2379, विक्रम लैंडर का वजन 1471 तथा प्रज्ञान रोवर का वजन २7 किलोग्राम था।

कक्षयान 1 किलोवाट, विक्रम लैंडर 650 वाट तथा प्रज्ञान रोवर 50 वाट उर्जा का प्रयोग करता हैं।

चंद्रयान-2 मिशन की अवधि

कक्षयान की अवधि 1 वर्ष, विक्रम लैंडर तथा प्रज्ञान रोवर की अवधि 15 दिन के लिए निर्धारित की गयी हैं।

चंद्रयान-2 मिशन का उद्देश्य

  • चंद्रयान-2 का मुख्य उद्देश्य चंद्रमा की सतह पर पानी के प्रसार और मात्रा का पता लगाना।
  •  चंद्रमा की सतह पर उपलब्ध खनिजों और रासायनिक तत्‍वों का अध्‍ययन करेगा।
  • चंद्रमा के बाहरी वातावरण के बारे में जानकारी जुटाना।
  • चंद्रमा के मौसम के बारे में जानकारी जुटाना।

Chandryan-1 GK Questions in Hindi

1. इसरो ने मिशन चंद्रयान-1 कब लांच किया गया?

  1. 22 मार्च 2008
  2. 22 अक्टूबर 2008
  3. 22 अगस्त 2009
  4. 22 अक्टूबर 2009

[su_spoiler title=”Show Answer” style=”fancy” icon=”caret”]Correct Answer : 22 अक्टूबर, 2008[/su_spoiler]

2. चंद्रयान-1 किस स्थान से लॉन्च किया गया था?

  1. इसरो सैटेलाइट सेंटर, बंगलुरु
  2. सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा
  3. विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र, तिरुवनंतपुरम
  4. लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर, तिरुवनंतपुरम

[su_spoiler title=”Show Answer” style=”fancy” icon=”caret”]Correct Answer : सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा[/su_spoiler]

  • इसे भी पढ़े-
  1. मोटर वाहन अधिनियम 2019 सम्पूर्ण जानकारी
  2. महत्वपूर्ण 206 राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दिवस
  3. भारत रत्न विजेता लिस्ट 1954-2019
  4. कंप्यूटर क्या हैं हिंदी में जानकारी? Computer Notes Hindi
You might also like