Fundamental Rights in Hindi भारतीय संविधान के मौलिक अधिकार PDF

Fundamental Rights in Hindi : मौलिक अधिकार, मौलिक के अधिकार, मौलिक अधिकार कितने है?, भारतीय संविधान में मौलिक अधिकार PDF download, List of fundamental rights, Importance of fundamental rights, Fundamental rights article, Fundamental rights in India, fundamental rights PDF, right to freedom, right to equality.

भारतीय संविधान में मौलिक अधिकार PDF

आज Sarkari Course आप सभी छात्रो के लिए एक ऐसा विषय ले कर आया हैं, जो सभी Students के लिए ही नही अपितु भारत के सभी नागरिको के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण हैं|

Fundamental Rights in Hindi

इस पोस्ट में हम आपको भारत के मौलिक अधिकार (Fundamental Rights) के बारे में बताएँगे, जो भारत के सभी नागरिको को जानना बहुत ही जरुरी हैं| मौलिक अधिकार से सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्न भी आते हैं|

मौलिक अधिकार

भारतीय संविधान ने भारत के नागरिकों को, उनके जन्म से ही कुछ अधिकार दिए हैं, जिसे हम मौलिक आधिकार कहते हैं| इन मौलिक अधिकारों को अधिकारों को हम सभी भारत के नागरिको से कोई नही छीन सकता हैं|

परन्तु कुछ विशेष परिस्थितियों में इन मौलिक अधिकारों में से कुछ अधिकार हम सभी से छीने जा सकते हैं अर्थात हम पर लागू नही होते| जैसे की आपातकाल के समय हमसे कुछ मौलिक अधिकार छीने जा सकते हैं| मौलिक अधिकार को मूल अधिकार भी कहा जाता है| इसे संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान से लिया गया हैं|

सभी मौलिक अधिकार नही किन्तु इसमें से कुछ मौलिक अधिकार भारत से बाहर यानि विदेशियों को भी दिया जा सकता हैं|

मौलिक अधिकार का जिक्र भारतीय संविधान के भाग-3 में हैं| इसका विस्तृत उल्लेख संविधान के भाग-3 में अनुच्छेद 12 से अनुच्छेद 35 (Article 12 – Article 35) तक किया गया हैं| संविधान के भाग – 3 को भारत का अधिकार पत्र भी कहा जाता हैं|

मौलिक अधिकार 2019

मूल संविधान में कुल सात मौलिक अधिकार थे परन्तु वर्तमान समय में, भारतीय संविधान में कुल छ: (Six-6) मौलिक अधिकार हैं|

44 वें संविधान संशोधन (1978 ई.) के बाद संपत्ति का अधिकार [अनुच्छेद 31 और 19 (a)] को मौलिक अधिकार की सूची से हटाकर, इसे अनुच्छेद 300 (a) के अंतर्गत रखा गया हैं| अब इसे कानूनी अधिकार बना दिया गया हैं|

भारत के नागरिकों के मौलिक अधिकार में संशोधन भी किया जा सकता हैं| आपात काल के दौरान (अनुच्छेद 352) जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को छोड़कर अन्य सभी मौलिक अधिकारों को हम सभी से छीना भी जा सकता हैं|

अगर कोई भी मौलिक अधिकार छीनता हैं हमारा तो हमें संविधान ने ये अधिकार दिया हैं की हम सीधे जा के उच्चतम न्यायलय (Supreme Court) में अर्जी लगा सकते हैं|

सन 1931 ई. में हुए कराची अधिवेशन में कांग्रेस अध्यक्ष सरदार वल्लभभाई पटेल ने घोषणा पत्र में मूल या मौलिक अधिकारों का मांग की| जवाहर लाल नेहरु ने मौलिक अधिकारों का प्रारूप बनाया था|

भारतीय नागरिकों को निम्नलिखित मूल अधिकार प्राप्त हैं:

  1. समानता या समता का अधिकार (अनुच्छेद 14 से लेकर अनुच्छेद 18 तक)
  2. स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 19 से लेकर अनुच्छेद 22 तक)
  3. शोषण के विरुद्ध अधिकार (अनुच्छेद 23 और अनुच्छेद 24)
  4. धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 25 से लेकर अनुच्छेद 28 तक)
  5. संस्कृति और शिक्षा सम्बन्धी अधिकार (अनुच्छेद 29 और अनुच्छेद 30)
  6. संवैधानिक उपचारों का अधिकार(अनुच्छेद 32)

Fundamental Rights in Hindi

Fundamental Rights Article

मौलिक अधिकार अनुच्छेद (अनुच्छेद 12 से अनुच्छेद 35 तक) भारतीय संविधान के भाग तीन हैं| संविधानमें उल्लेखित मौलिक अधिकार सभी नागरिकों को व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से कुछ बुनियादी स्वतंत्रता प्रदान करता है।

अनुच्छेद 12 और अनुच्छेद 13: अनुच्छेद 12 और 13 हमारे अधिकारों से जुड़ा हुआ नही हैं| इसमें राज्य की व्याख्या की गयी हैं यानि राज्य के बारे में बताया गया हैं|

1. समता या समानता का अधिकार:

अनुच्छेद 14: विधि (कानून) के समक्ष समानता या समता- इस अनुच्छेद में कहा गया हैं की हम सभी लोग विधि या कानून समक्ष समान हैं| अर्थात सभी नागरिको के लिए एक समान कानून बनेगा और एक समान लागू भी होगा|

अनुच्छेद 15: जाति, धर्म, लिंग, नस्ल या जन्म स्थान पर भेदभाव का निषेध- अनुच्छेद कहता हैं आप किसी भी जाति, धर्म, लिंग, नस्ल के हो या आपका जन्म भारत में कही भी हुआ हो, शहर में या गाँव में, अमीर घर में या गरीब घर में, आपके साथ कोई भेद भाव नही होगा|

अनुच्छेद 16: लोक नियोजन के विषय में सामान अवसर- अनुच्छेद 16 के अनुसार सरकार के अधीन किसी भी पद नियुक्ति या नियोजन सभी नागरिको के लिए एक सामान होगी| SC, SC और OBC को छोड़कर कर क्योंकि इनके लिए कुछ अलग से कानून हैं|

अनुच्छेद 17: छुआछूत या अस्पृश्यता का अंत- अनुच्छेद 17 के अनुसार छुआछूत को ख़त्म कर दिया हैं| अगर कोई भी जाति या धर्म के लोग छुआछूत से ग्रसित है तो वो सीधे उच्चतम न्यायलय जा सकता हैं|

अनुच्छेद 18: उपाधियों का अंत- अंग्रेज जब भारत में थे तो वो अपने लोगो को “सर” आदि के उपाधि के देते थे| जिससे की इसमें से कुछ लोग अंग्रेज के लिए काम करने लगते हैं|
लेकिन अनुच्छेद 18 के अनुसार ऐसे सभी उपाधि को ख़त्म कर दिया गया और सरकार लोगो के अच्छे काम के लिए भारत रत्न, पदम विभूषण, पदम श्री और सेना के लिए परमवीर चक्र, वीर चक्र आदि पुरस्कार या उपाधि अनुच्छेद 18 के तहत देने लगी|

2. स्वतंत्रता का अधिकार

अनुच्छेद  19: मूल संविधान में 7 प्रकार के स्वतंत्रता का अधिकार थे लेकिन 44 वें संविधान संशोधन के बाद अनुच्छेद 19(f) संपत्ति का अधिकार को हटाकर अनुच्छेद 300 (a) में जोड़ दिया गया हैं| अभी सिर्फ 6 स्वतंत्रता का अधिकार हैं-

अनुच्छेद 19(a): अभिव्यक्ति या बोलने की आजादी, प्रेस की आजादी, झंडा फहराने की आजादी (2004 से), सूचना का अधिकार (RTI – 2005 में लागू हुआ)|

अनुच्छेद 19(b): बिना कोई अस्त्र-शस्त्र, हथियार के शांतिपूर्ण एकत्रित होने और सभा करने की आज़ादी|

अनुच्छेद 19(c): समूह या संघ बनाने की आजादी या स्वतंत्रता|

अनुच्छेद 19(d): भारत देश के किसी भी हिस्से में आने, जाने और घूमने की आजादी|

अनुच्छेद 19(e): जम्मू कश्मीर को छोड़कर देश के किसी भी क्षेत्र में निवास करने और वहाँ बसने की आजादी हैं|

अनुच्छेद 19(f): सम्पति का अधिकार- 1978 में 44 वें संविधान संशोधन के बाद इसे हटा कर अनुच्छेद 300 (a) के अंतर्गत रख दिया गया हैं, जो अब एक कानूनी अधिकार हैं|

अनुच्छेद 19(g): जो आपके मन में हो, वो आप रोजगार, व्यापार और जीविका चलने की स्वतंत्रता|

अनुच्छेद 20: अपराधों के लिए दोष सिद्धि के सम्बन्ध में संरक्षण- अनुच्छेद 20 में कहा गया हैं की जब तक किसी अपराधी का दोष सिद्धि न हो, उसे कोई भी सजा नही होगी| इसके अंतर्गत तीन तरह की स्वतंत्रता दी गयी हैं-

  1. किसी भी अपराधी को एक अपराध के लिए सिर्फ एक बार ही सजा मिलेगी|
  2. दोष सिद्धि होने के बाद किसी भी अपराधी को अपराध करने के समय जो कानून रहा होगी उसी के तहत सजा मिलेगी की पहले और बाद के कानून के हिसाब से|
  3. किसी भी व्यक्ति या अपराधी को स्वयं के विरुद्ध या पक्ष में न्यायलय में गवाही देने के लिए बाध्य नही किया जा सकता हैं|

अनुच्छेद 21: प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण- अनुच्छेद 21 सभी भारतीयों को व्यक्तिगत स्वतंत्रता और जीवन का संरक्षण यानि जिन्दा रहने का अधिकार देता हैं| बाद में इस अनुच्छेद में जानवर के जीवन का संरक्षण भी जोड़ दिया गया|

अनुच्छेद 21 हम सभी के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण हैं| ये हमारी वो ताकत हैं, जिसे हमसे कोई भी नही छीन सकता, चाहे देश में आपातकाल ही क्यों न अ जाये| जबकि अन्य मौलिक अधिकार हम सब से छीने जा सकते हैं|

  • इसे भी पढ़ें-
  1. Hindi Grammar – हिंदी व्याकरण
  2. Varn Vichar – वर्ण विचार | हिंदी व्याकरण
  3. Union Budget in Hindi आम बजट क्या हैं? Union Budget 2019
  4. Compound Interest Formula (चक्रवृद्धि ब्याज), Tricks in Hindi
  5. भारत की प्रमुख नदियाँ और उनके उद्गम स्थल PDF
  6. सभी राज्यों के मुख्यमंत्री व राज्यपाल के नाम 2019 [Updated]
  7. Compound Interest Formula (चक्रवृद्धि ब्याज), Tricks in Hindi
You might also like